Daily Current Affairs
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Daily Current Affairs: 12 June 2026
12 जून 2026: राजस्थान में 'संजीवनी वाटिका' मॉडल उद्यान, अपर हाई लेवल कैनाल में स्काडा प्रणाली, पीएम-कुसुम प्रगति और पंच गौरव योजना।
📅 दैनिक समसामयिकी (Daily Current Affairs): 12 जून 2026
विषय 1: राजस्थान में पर्यावरण संरक्षण व 'संजीवनी वाटिका' मॉडल उद्यान परियोजना
चर्चा में क्यों?
पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र (Green Cover) को बढ़ाने के उद्देश्य से राजस्थान सरकार द्वारा राज्य के 16 जिलों में मॉडल उद्यानों को 'संजीवनी वाटिका' (Sanjeevani Vatika) के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसके लिए सरकार द्वारा ₹32 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है।
मुख्य विशेषताएं (Key Features)
- सघन पौधारोपण: इन उद्यानों में औषधीय पौधे, छायादार वृक्ष और स्थानीय प्रजातियों के पेड़ों को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि पर्यावरण संतुलन बना रहे।
- क्रियान्वयन: यह योजना राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी हरित अभियान के तहत विभिन्न जिलों में क्रियान्वित की जा रही है।
विषय 2: बांसवाड़ा की 'अपर हाई लेवल कैनाल परियोजना' और स्काडा (SCADA) तकनीक
चर्चा में क्यों?
बांसवाड़ा जिले के आदिवासी बाहुल्य 'वागड़' अंचल में सिंचाई क्षमता बढ़ाने के लिए निर्माणाधीन अपर हाई लेवल कैनाल परियोजना को पूर्णतः आधुनिक तकनीक से लैस किया जा रहा है। इस परियोजना में जल वितरण और निगरानी के लिए स्काडा (SCADA - Supervisory Control and Data Acquisition) प्रणाली स्थापित की जा रही है।
महत्वपूर्ण बिंदु (Significance of SCADA)
- स्वचालित नियंत्रण: मुख्य नियंत्रण कक्ष से नहर के गेट्स, जल प्रवाह और दबाव को बिना मानवीय हस्तक्षेप के नियंत्रित किया जा सकेगा।
- समान जल वितरण: स्काडा प्रणाली यह सुनिश्चित करेगी कि नहर के टेल-एंड (अंतिम छोर) पर स्थित किसानों के खेतों तक भी पर्याप्त पानी पहुंचे।
- पानी की बचत: रिसाव या अत्यधिक प्रवाह की स्थिति में अलार्म और स्वचालित सेंसर वाल्व बंद हो जाएंगे, जिससे जल की बर्बादी न्यूनतम होगी।
- परियोजना की लागत: लगभग ₹2,500 करोड़ की लागत वाली इस नहर प्रणाली से बांसवाड़ा, बागीदौरा और कुशलगढ़ क्षेत्र की 42,000 हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी।
विषय 3: पीएम-कुसुम योजना में राजस्थान की उपलब्धियां
चर्चा में क्यों?
नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, केंद्र सरकार की पीएम-कुसुम (Pradhan Mantri Kisan Urja Suraksha evm Utthaan Mahabhiyan) योजना के सफल क्रियान्वयन में सौर ऊर्जा परियोजनाओं को स्थापित करने में राजस्थान देश में प्रथम स्थान पर अग्रणी बना हुआ है।
कुसुम योजना के विभिन्न घटक (Components of PM-KUSUM)
- कम्पोनेंट-ए (Component-A): बंजर या अनुपयोगी भूमि पर 500 किलोवाट से 2 मेगावाट क्षमता के विकेंद्रीकृत ग्रिड-संबद्ध सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना।
- कम्पोनेंट-बी (Component-B): स्टैंड-अलोन (ऑफ-ग्रिड) कृषि पंपों की स्थापना।
- कम्पोनेंट-सी (Component-C): ग्रिड-संबद्ध कृषि पंपों का सौरीकरण (Solarisation of Grid-connected Agriculture Pumps)।
- इन सभी श्रेणियों में राजस्थान देश के अन्य राज्यों की तुलना में सबसे अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
विषय 4: राजस्थान की 'पंच गौरव योजना' और जालोर का 'जीरा'
चर्चा में क्यों?
राजस्थान के आयोजना विभाग द्वारा प्रारंभ की गई 'पंच गौरव योजना' के तहत प्रत्येक जिले की विशिष्ट पहचान और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दिया जा रहा है। योजना के 'एक जिला - एक उपज' (One District One Crop) घटक के तहत जालोर जिले के जीरे (Cumin) को वैश्विक मंच प्रदान करने की दिशा में कार्य योजना तैयार की गई है।
पंच गौरव योजना का स्वरूप (Structure of Panch Gaurav)
योजना के तहत जिलों के विकास के लिए 5 स्तंभ (गौरव) निर्धारित किए गए हैं:
- एक उपज (One Crop): कृषि उत्पाद को प्रोत्साहन (जैसे जालोर के लिए जीरा)।
- एक वनस्पति प्रजाति (One Species): स्थानीय पारिस्थितिकी का संरक्षण (जैसे जालोर के लिए जाल वृक्ष)।
- एक उत्पाद (One Product): पारंपरिक शिल्प/उद्योग (जैसे जालोर के लिए ग्रेनाइट)।
- एक पर्यटन स्थल (One Destination): धार्मिक/ऐतिहासिक स्थल (जैसे जालोर के लिए सुंधा माता मंदिर)।
- एक खेल (One Sport): खेल प्रतिभाओं को मंच (जैसे जालोर के लिए बॉक्सिंग)।
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