Daily Current Affairs
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Daily Current Affairs: 11 June 2026
11 जून 2026: M1xchange व TReDS फ्रेमवर्क, RBI मौद्रिक नीति समीक्षा और केरल का HAWK वाइल्डलाइफ ई-कोर्ट एकीकरण।
📅 दैनिक समसामयिकी (Daily Current Affairs): 11 जून 2026
विषय 1: M1xchange और TReDS फ्रेमवर्क (Trade Receivables Discounting System)
चर्चा में क्यों?
भारतीय एमएसएमई (MSMEs) के कार्यशील पूंजी संकट (Working Capital Constraints) को दूर करने और तरलता (Liquidity) प्रवाह को बेहतर बनाने में M1xchange और TReDS फ्रेमवर्क एक गेम-चेंजर साबित हो रहे हैं। विशेष रूप से हाल ही में गिफ्ट सिटी (GIFT City) में लॉन्च हुए M1NXT ITFS प्लेटफॉर्म ने इसे वैश्विक स्तर पर विस्तारित किया है।
मुख्य विशेषताएं और कार्यप्रणाली (Key Features & Mechanism)
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TReDS (ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम) क्या है?
- यह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विनियमित एक ऑनलाइन इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म है।
- इसका मुख्य उद्देश्य एमएसएमई को उनके द्वारा बड़े कॉर्पोरेट्स और सरकारी विभागों को दिए गए बिलों (Invoices) पर तुरंत लोन या नगदी उपलब्ध कराना है।
- इसे भुगतान और निपटान प्रणाली (PSS) अधिनियम, 2007 के तहत वर्ष 2015 में आरबीआई द्वारा अधिकृत किया गया था।
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M1xchange की परिचालन प्रणाली: यह प्लेटफॉर्म मुख्य रूप से तीन हितधारकों (Stakeholders) को जोड़ता है:
- एमएसएमई (आपूर्तिकर्ता/Suppliers): जो अपना माल बेचकर बिल जनरेट करते हैं।
- कॉर्पोरेट्स/PSUs/सरकारी विभाग (खरीदार/Buyers): जो माल खरीदते हैं और बिल को स्वीकार करते हैं।
- बैंक/NBFCs (फाइनेंसर/Financiers): जो उन बिलों पर तुरंत पैसा उधार देते हैं।
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जोखिम न्यूनीकरण (Risk Mitigation):
- यह फंडिंग बिना किसी कोलेटरल (Collateral-Free) और नॉन-रिकोर्स (Non-Recourse) आधार पर होती है।
- इसका मतलब है कि यदि बाद में कॉर्पोरेट खरीदार भुगतान करने में डिफ़ॉल्ट करता है, तो बैंक एमएसएमई से पैसा वापस नहीं मांग सकता। यह जोखिम पूरी तरह फाइनेंसर उठाता है।
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ओपन बिडिंग मॉडल (Competitive Discovery):
- इस प्लेटफॉर्म पर सरकारी, निजी और विदेशी बैंक आपस में प्रतिस्पर्धा (Bidding) करते हैं। इसके चलते एमएसएमई को सबसे कम ब्याज दरों पर फंड उपलब्ध हो जाता है।
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अनिवार्य पंजीकरण (Mandatory Compliance):
- एमएसएमई मंत्रालय के निर्देशानुसार, ₹250 करोड़ से अधिक टर्नओवर वाली सभी कंपनियों और सभी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSEs) के लिए TReDS प्लेटफॉर्म पर पंजीकरण करना अनिवार्य है। इसकी निगरानी कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (RoC) द्वारा की जाती है।
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M1NXT ITFS (अंतरराष्ट्रीय व्यापार वित्तपोषण):
- M1xchange ने गिफ्ट सिटी (GIFT City - गुजरात) में भारत का पहला ITFS (International Trade Financing Services) प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है।
- इसके माध्यम से भारतीय एमएसएमई को अंतरराष्ट्रीय फैक्टरिंग सेवाएं प्राप्त होंगी, जिससे वैश्विक फाइनेंसर और विदेशी बैंक भारतीय एमएसएमई को प्रतिस्पर्धी दरों पर डॉलर लिक्विडिटी प्रदान कर सकेंगे।
विषय 2: RBI मौद्रिक नीति समीक्षा (Monetary Policy Committee - जून 2026)
चर्चा में क्यों?
जून 2026 की द्विमासिक समीक्षा बैठक में, आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से नीतिगत रेपो रेट को 5.25% पर यथावत (Unchanged) रखने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही भू-राजनीतिक तनावों को देखते हुए वित्त वर्ष 27 (FY27) के लिए जीडीपी संवृद्धि दर के अनुमान को घटाकर 6.6% कर दिया है।
प्रमुख मौद्रिक दरें (Key Policy Rates)
| दर का नाम (Policy Rate) | वर्तमान स्थिति (June 2026) | विवरण (Significance) |
|---|---|---|
| पॉलिसी रेपो रेट (Repo Rate) | 5.25% | वह दर जिस पर आरबीआई बैंकों को अल्पकालिक ऋण देता है। |
| स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) | 5.00% | यह LAF कॉरिडोर की निचली सीमा (Floor) है (बिना कोलेटरल के बैंकों से तरलता सोखने की दर)। |
| मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) | 5.50% | यह LAF कॉरिडोर की ऊपरी सीमा (Ceiling) है (बैंकों के लिए आपातकालीन ओवरनाइट लोन दर)। |
| बैंक दर (Bank Rate) | 5.50% | दीर्घकालिक ऋणों के लिए लागू दर। |
- नीतिगत रुख (Policy Stance): समिति ने अपना रुख 'तटस्थ' (Neutral) बनाए रखा है। यह आरबीआई को आने वाले आंकड़ों (Data-dependent) के अनुसार भविष्य में ब्याज दरों को किसी भी दिशा में मोड़ने की लचीलापन देता है।
- विकास दर और मुद्रास्फीति का अनुमान:
- जीडीपी वृद्धि दर (Real GDP Growth): FY27 के लिए अनुमान घटाकर 6.6% (पहले 6.9% था) किया गया।
- मुद्रास्फीति (CPI Inflation): हेडलाइन सीपीआई मुद्रास्फीति का अनुमान बढ़ाकर 5.1% किया गया, जबकि कोर इन्फ्लेशन 4.7% रहने का अनुमान है।
समष्टि आर्थिक जोखिम (Macroeconomic Risks)
- कच्चे तेल की कीमतें: भू-राजनीतिक संघर्षों के कारण भारतीय बास्केट क्रूड का औसत बढ़कर $110 प्रति बैरल हो गया है, जिससे प्लास्टिक, रसायन और धातुओं की इनपुट लागत बढ़ गई है।
- मौसम की अनिश्चितता: कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून और अल नीनो (El Niño) की स्थिति से कृषि उत्पादन और ग्रामीण मांग प्रभावित होने की आशंका है।
रुपये को मजबूत करने और विदेशी पूंजी आकर्षित करने के रणनीतिक उपाय (Foreign Capital & Rupee Stabilization)
- LTCG टैक्स छूट: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) को सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) में निवेश पर मिलने वाले ब्याज और 12.5% के लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स से पूर्ण छूट दी गई है (1 अप्रैल 2026 से पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू)।
- FAR (फुली एक्सेसिबल रूट) का विस्तार: बिना किसी मात्रात्मक प्रतिबंध के गैर-निवासियों के लिए 15, 30 और 40 वर्ष की अवधि के G-Secs और सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड्स (SGBs) को इस मार्ग में शामिल किया गया है।
- जनरल रूट प्रतिबंधों को हटाना: FPIs के लिए अल्पकालिक निवेश सीमाओं और सुरक्षा-वार निवेश सीमाओं को हटा दिया गया है। केवल व्यापक सीमाएं (केंद्रीय G-Secs का 6% और राज्य सरकारी प्रतिभूतियों का 2%) ही लागू रहेंगी।
- विदेशी मुद्रा स्वैप (Forex Swaps): सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) के बाह्य वाणिज्यिक ऋणों (ECBs) को सब्सिडी देने के लिए रियायती फॉरेक्स स्वैप विंडो को 30 सितंबर 2026 तक बढ़ा दिया गया है।
- निर्यात भुगतान प्राप्ति समय सीमा में कटौती: बैंकिंग प्रणाली में डॉलर की तरलता बढ़ाने के लिए निर्यात आय को भारत वापस लाने की अनिवार्य समय-सीमा कोरोना काल के 15 महीनों से घटाकर पुनः 9 महीने कर दी गई है।
विषय 3: केरल का HAWK वाइल्डलाइफ क्राइम सिस्टम और ई-कोर्ट एकीकरण
चर्चा में क्यों?
हाल ही में केरल वन विभाग ने अपने HAWK (Hostile Activity Watch Kernel) सिस्टम के लिए ई-कोर्ट एकीकरण (E-Court Integration) सुविधा शुरू की है। इसके साथ ही केरल वन अपराध प्रबंधन को पूरी तरह से डिजिटल और न्यायपालिका से एकीकृत करने वाला भारत का पहला राज्य बन गया है।
HAWK सिस्टम के मुख्य तथ्य (What is HAWK System?)
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यह क्या है?
- HAWK एक क्लाउड-आधारित सूचना प्रबंधन प्रणाली (Cloud-based Information Management System) है।
- यह वन्यजीव अपराधों, शिकारियों, संदिग्ध अपराधियों और वन्यजीवों की मृत्यु दर (Wildlife Mortality) का एक एकीकृत डेटाबेस रखता है।
- यह वन अधिकारियों को पारिस्थितिकीय खुफिया जानकारी (Ecological Intelligence) और व्यापक केस प्रबंधन सहायता प्रदान करता है।
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विकास किसने किया?
- इसे केरल वन विभाग और वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (WTI) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किया गया है।
- इसकी शुरुआत 2017 में हुई थी और केरल में इसे आधिकारिक रूप से 2019 में लॉन्च किया गया था।
- इसकी सफलता को देखते हुए बाद में इसे कर्नाटक (2022), तमिलनाडु (2025) और ओडिशा (2025) में भी लागू किया गया।
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ई-कोर्ट एकीकरण (E-Court Integration):
- अब यह प्रणाली API (Application Programming Interface) के माध्यम से सीधे न्यायिक प्रणाली से जुड़ गई है।
- इससे कागजी कार्यवाही समाप्त हो जाएगी और प्रारंभिक अपराध रिपोर्ट (POR) दर्ज होने से लेकर कोर्ट के फैसले, गवाहों के बयानों और अंतिम अदालती फैसलों की रियल-टाइम ट्रैकिंग संभव हो सकेगी।
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