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RPSC RAS Prelims Syllabus 2026 PDF in Hindi: परीक्षा पैटर्न और विस्तृत पाठ्यक्रम

Jun 6, 202612 min readBy NCZ Expert TeamLast updated: 6/6/2026

RPSC RAS Prelims Syllabus 2026: राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा आयोजित की जाने वाली राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) परीक्षा राज्य की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा है। एसडीएम (SDM), डीएसपी (DSP), तहसीलदार और अन्य प्रशासनिक पदों पर चयनित होने के लिए अभ्यर्थियों को इस कठिन परीक्षा से गुजरना पड़ता है।

इस परीक्षा का पहला चरण आरएएस प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) होता है। परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के लिए नवीनतम परीक्षा पैटर्न और विस्तृत पाठ्यक्रम की गहरी समझ होना अत्यंत आवश्यक है।

इस लेख में हमने आरपीएससी द्वारा जारी आधिकारिक पाठ्यक्रम के आधार पर RPSC RAS Prelims Syllabus in Hindi और परीक्षा पैटर्न की संपूर्ण जानकारी नीचे आसान भाषा में प्रदान की है।


RPSC RAS Prelims Exam Pattern (परीक्षा पैटर्न)

आरएएस प्रारंभिक परीक्षा में केवल एक ही पेपर होता है जो वैकल्पिक प्रकार (Objective Type) का होता है:

विवरण जानकारी
विषय सामान्य ज्ञान और सामान्य विज्ञान (General Knowledge & General Science)
प्रश्नों की संख्या 150 प्रश्न (MCQs)
कुल अंक 200 अंक
परीक्षा की अवधि 3 घंटे (180 मिनट)
नकारात्मक अंकन (Negative Marking) 1/3 (प्रत्येक गलत उत्तर पर 1/3 अंक काटा जाएगा)

RPSC RAS Prelims Syllabus in Hindi (विस्तृत पाठ्यक्रम)

आरएएस प्रारंभिक परीक्षा के विस्तृत पाठ्यक्रम को मुख्य रूप से निम्नलिखित भागों में विभाजित किया गया है:

1. राजस्थान का इतिहास, कला, संस्कृति, साहित्य, परंपरा और विरासत

यह खंड राजस्थान की संस्कृति और ऐतिहासिक धरोहर पर केंद्रित है:

  • प्रागैतिहासिक स्थल: पुरापाषाण काल से ताम्रपाषाण और कांस्य युग तक के राजस्थान के प्रागैतिहासिक स्थलों का विस्तृत अध्ययन।
  • प्रारंभिक ऐतिहासिक केंद्र: ईसा पूर्व से प्रारंभिक ईसाई युग के दौरान महत्वपूर्ण ऐतिहासिक केंद्रों का अवलोकन, प्राचीन राजस्थान के समाज, धर्म और संस्कृति।
  • प्रमुख राजवंश और योगदान: गुहिल, प्रतिहार, चौहान, परमार, राठौड़, सिसोदिया और कच्छावा राजवंशों का राजनीतिक और सांस्कृतिक योगदान; मध्यकाल में उनकी प्रशासनिक और राजस्व प्रणाली।
  • आधुनिक राजस्थान का उदय: 19वीं-20वीं शताब्दी के दौरान सामाजिक सुधारक, राजनीतिक चेतना जागृत करने में समाचार पत्रों और राजनीतिक संस्थाओं की भूमिका, किसान और जनजातीय आंदोलन, प्रजामंडल आंदोलन और राजस्थान का एकीकरण।
  • स्थापत्य विरासत: राजस्थान के प्रमुख मंदिर, किले, महल, हवेलियां और पारंपरिक जल संरचनाएं (बावड़ी आदि)।
  • चित्रकला और हस्तशिल्प: राजस्थान की विभिन्न चित्रकला शैलियाँ (मेवाड़, मारवाड़, ढूंढाड़, हाड़ौती स्कूल) और हस्तशिल्प उत्पाद।
  • प्रदर्शन कला: शास्त्रीय संगीत और लोक संगीत, पारंपरिक वाद्य यंत्र, राजस्थान के प्रसिद्ध लोक नृत्य और लोक नाट्य (जैसे ख्याल, रम्मत, तमाशा)।
  • भाषा और साहित्य: राजस्थानी भाषा और उसकी क्षेत्रीय बोलियाँ (जैसे मारवाड़ी, ढूंढाड़ी, मेवाती, हाड़ौती), राजस्थानी शास्त्रीय और लोक साहित्य।
  • धार्मिक जीवन: राजस्थान के प्रमुख संत, संप्रदाय, लोक देवता और देवियाँ (जैसे पाबूजी, हड़बूजी, रामदेवजी, तेजाजी, गोगाजी) और विभिन्न धार्मिक समुदायों की विविधता।
  • सामाजिक जीवन: प्रमुख मेले, त्यौहार, सामाजिक रीति-रिवाज, परंपराएं, पारंपरिक वेशभूषा और आभूषण।
  • प्रमुख व्यक्तित्व: राजस्थान के इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले प्रमुख व्यक्तित्वों का योगदान।

2. भारत का इतिहास (Indian History)

इस खंड को प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक भारत के इतिहास में बांटा गया है:

प्राचीन और मध्यकालीन भारत

  • सांस्कृतिक आधार: सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization) और वैदिक युग; ईसा पूर्व छठी शताब्दी में संन्यास परंपराओं और नए धार्मिक दर्शनों का उदय—आजीवक, बौद्ध धर्म और जैन धर्म।
  • प्रमुख राजवंश और शासक: मौर्य, कुषाण, सातवाहन, गुप्त, चालुक्य, पल्लव और चोल राजवंशों का राजनीतिक और सांस्कृतिक योगदान।
  • कला और वास्तुकला: प्राचीन भारत में मंदिर स्थापत्य, मूर्तिकला और शहरी वास्तुकला शैलियों का क्रमिक विकास।
  • भाषा और साहित्य: प्राचीन काल में संस्कृत, प्राकृत और तमिल साहित्य का विकास।
  • सल्तनत काल: दिल्ली सल्तनत के शासकों की उपलब्धियां और विजयनगर साम्राज्य की सांस्कृतिक विरासत।
  • मुगल साम्राज्य: अफगान, राजपूत, दक्कन राज्यों और मराठों के साथ राजनीतिक चुनौतियां और सुलह; मुगल काल के दौरान कला, वास्तुकला, संगीत और चित्रकला का विकास।
  • भक्ति और सूफी आंदोलन: धार्मिक और साहित्यिक योगदान जिसने सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक प्रगति को बढ़ावा दिया।

आधुनिक भारत (19वीं शताब्दी की शुरुआत से 1964 तक)

  • राष्ट्रवाद का उदय: बौद्धिक जागरण के माध्यम से आधुनिक भारत और राष्ट्रवाद का उदय, पश्चिमी शिक्षा का प्रसार और प्रेस की भूमिका।
  • सामाजिक-धार्मिक सुधार: 19वीं सदी के प्रमुख समाज सुधारक (जैसे राजा राममोहन राय, स्वामी दयानन्द सरस्वती) और संस्थाएं जिन्होंने सामाजिक कुरीतियों को चुनौती दी।
  • स्वतंत्रता संग्राम: भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के विभिन्न चरण—उदारवादी (Moderate), उग्रवादी (Extremist), गांधीवादी चरण (Gandhian) और क्रांतिकारी आंदोलन; स्वतंत्रता संग्राम में देश के विभिन्न हिस्सों का योगदान।
  • स्वतंत्रता के बाद का राष्ट्र निर्माण: भाषाई आधार पर राज्यों का पुनर्गठन, नेहरूवादी युग में देश में संस्थागत ढांचा खड़ा करना, विज्ञान और प्रौद्योगिकी का विकास।

3. विश्व और भारत का भूगोल (Geography)

इस खंड में वैश्विक, राष्ट्रीय और क्षेत्रीय भूगोल को कवर किया गया है:

विश्व का भूगोल (World Geography)

  • प्रमुख स्थलाकृतियाँ: पर्वत, पठार, मैदान और मरुस्थल।
  • जल निकाय: विश्व की प्रमुख नदियाँ और झीलें।
  • वैश्विक कृषि: विश्व स्तर पर की जाने वाली कृषि के विभिन्न प्रकार।
  • औद्योगिक क्षेत्र: दुनिया के प्रमुख और महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र।
  • पर्यावरणीय मुद्दे: मरुस्थलीकरण (Desertification), वनों की कटाई (Deforestation), जलवायु परिवर्तन (Climate Change), ग्लोबल वॉर्मिंग (Global Warming) और ओजोन परत का क्षरण।

भारत का भूगोल (Geography of India)

  • भौतिक प्रदेश: हिमालय पर्वतमाला, प्रायद्वीपीय पठार और गंगा-यमुना के मैदान।
  • जलवायु: मानसून का तंत्र और भारत में वर्षा का वितरण।
  • नदियाँ और झीलें: भारत का अपवाह तंत्र।
  • कृषि फसलें: गेहूं, चावल, कपास, गन्ना, चाय और कॉफी जैसी महत्वपूर्ण फसलें।
  • खनिज संसाधन: लौह अयस्क, मैंगनीज, बॉक्साइट और अभ्रक का वितरण।
  • ऊर्जा संसाधन: पारंपरिक (कोयला, पेट्रोलियम) और गैर-पारंपरिक (सौर, पवन) ऊर्जा संसाधन।
  • उद्योग: भारत के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र।
  • परिवहन: राष्ट्रीय राजमार्ग और प्रमुख परिवहन गलियारे (जैसे स्वर्णिम चतुर्भुज)।

राजस्थान का भूगोल (Geography of Rajasthan)

  • भौतिक प्रदेश: राजस्थान के प्रमुख भौतिक प्रदेश (अरावली, मरुस्थल, पठार, पूर्वी मैदान) और उनकी विशेषताएं।
  • जलवायु: राजस्थान की जलवायु की विशेषताएं और वर्षा का पैटर्न।
  • अपवाह तंत्र: राज्य की प्रमुख नदियाँ और झीलें।
  • वनस्पति और मृदा: प्राकृतिक वनस्पति, वन आवरण और मिट्टी के प्रकार।
  • फसलें: गेहूं, मक्का, जौ, कपास, गन्ना, और बाजरा।
  • उद्योग: राजस्थान के प्रमुख उद्योग और औद्योगिक क्षेत्र (RIICO आदि)।
  • सिंचाई और जल: प्रमुख सिंचाई परियोजनाएं और पारंपरिक जल संरक्षण तकनीकें।
  • जनसांख्यिकी: जनसंख्या वृद्धि, घनत्व, साक्षरता दर, लिंगानुपात और राजस्थान की प्रमुख जनजातियाँ (भील, मीणा, गरासिया आदि)।
  • खनिज: धात्विक और गैर-धात्विक खनिजों का वितरण।
  • ऊर्जा: पारंपरिक और गैर-पारंपरिक ऊर्जा संसाधन (सौर ऊर्जा पर विशेष ध्यान)।
  • जैव विविधता: राष्ट्रीय उद्यान, वन्यजीव अभयारण्य और जैव विविधता संरक्षण के प्रयास।
  • पर्यटन: प्रमुख पर्यटन केंद्र और पर्यटन सर्किट।

4. भारतीय संविधान, राजनीतिक व्यवस्था और शासन

  • भारतीय संविधान: संविधान सभा के माध्यम से संविधान का निर्माण, संविधान की प्रमुख विशेषताएं, महत्वपूर्ण संविधान संशोधन, प्रस्तावना (Preamble), मौलिक अधिकार (Fundamental Rights), राज्य के नीति निदेशक तत्व (DPSPs), और मौलिक कर्तव्य (Fundamental Duties)।
  • भारतीय राजनीतिक व्यवस्था: राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और संघीय मंत्रिपरिषद की शक्तियां; संसद, सर्वोच्च न्यायालय और न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) का अधिकार।
  • महत्वपूर्ण आयोग और संस्थाएं: निर्वाचन आयोग (Election Commission), भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG), नीति आयोग (NITI Aayog), केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC), लोकपाल, केंद्रीय सूचना आयोग (CIC), और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC)।
  • प्रमुख अवधारणाएं: संघवाद (Federalism), गठबंधन की राजनीति, राष्ट्रीय एकीकरण और लोकतांत्रिक मूल्य।

5. राजस्थान की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था

  • राजनीतिक व्यवस्था: राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद, राज्य विधानसभा और राजस्थान उच्च न्यायालय (High Court)।
  • प्रशासनिक व्यवस्था: जिला प्रशासन, पंचायती राज संस्थाएं (PRIs) और शहरी स्थानीय स्वशासन (Local Self Government)।
  • राज्य स्तर के आयोग: RPSC, लोकायुक्त, राज्य मानवाधिकार आयोग, राज्य निर्वाचन आयोग और राज्य सूचना आयोग।
  • सार्वजनिक नीति और अधिकार: कानूनी अधिकार, नागरिक अधिकार पत्र (Citizen’s Charter) और प्रमुख नीतिगत ढांचा।

6. आर्थिक अवधारणाएं और भारतीय अर्थव्यवस्था

  • बुनियादी आर्थिक अवधारणाएं: बजट निर्माण, बैंकिंग प्रणाली, वस्तु एवं सेवा कर (GST), लोक वित्त (Public Finance), राष्ट्रीय आय, आर्थिक संवृद्धि और विकास की अवधारणा, प्रशासन में लेखांकन (Accounting) उपकरण और उनका उपयोग, शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड, राजकोषीय और मौद्रिक नीतियां, सब्सिडी और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), ई-कॉमर्स और मुद्रास्फीति (Inflation)।
  • आर्थिक विकास और योजना: कृषि, उद्योग, सेवा और व्यापार क्षेत्र की वर्तमान स्थिति, चुनौतियां और सुधार; भारत में उदारीकरण और आर्थिक सुधार।
  • मानव संसाधन और विकास: मानव विकास सूचकांक (HDI) और प्रसन्नता सूचकांक (Happiness Index); गरीबी और बेरोजगारी के कारण, प्रकार और उनके उन्मूलन के उपाय; प्रमुख कल्याणकारी और फ्लैगशिप योजनाएं।
  • सामाजिक न्याय: समाज के कमजोर और पिछड़े वर्गों के लिए कल्याणकारी प्रावधान।

7. राजस्थान की अर्थव्यवस्था (Economy of Rajasthan)

  • आर्थिक परिदृश्य: राज्य की अर्थव्यवस्था का व्यापक अवलोकन, कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे।
  • नियोजन और ढांचा: राज्य की विकास और नियोजन रणनीतियां, बुनियादी ढांचा और संसाधन विकास।
  • राज्य की प्रमुख योजनाएं: SC/ST, OBC, अल्पसंख्यकों, महिलाओं, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों, किसानों और श्रमिकों के कल्याण के लिए राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही प्रमुख योजनाएं।

8. विज्ञान और प्रौद्योगिकी (Science & Technology)

  • सामान्य विज्ञान: दैनिक जीवन में विज्ञान के बुनियादी सिद्धांत।
  • सूचना प्रौद्योगिकी: कंप्यूटर, इंटरनेट, सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) की मूल बातें।
  • अंतरिक्ष और रक्षा: रक्षा प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष कार्यक्रम, उपग्रह और प्रक्षेपण यान (ISRO के अभियान)।
  • आधुनिक तकनीक: जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology), नैनो-टेक्नोलॉजी और जेनेटिक इंजीनियरिंग।
  • स्वास्थ्य और पोषण: भोजन और पोषण, संतुलित आहार, रक्त समूह और Rh फैक्टर; संक्रामक, गैर-संक्रामक और जूनोटिक (Zoonotic) बीमारियां।
  • पर्यावरण: पारिस्थितिकी (Ecology), जैव विविधता, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और सतत विकास (Sustainable Development)।
  • कृषि और पशुपालन: राजस्थान के संदर्भ में कृषि, बागवानी (Horticulture) और पशुपालन का अध्ययन।
  • वैज्ञानिक प्रगति: राजस्थान में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हालिया प्रगति।

9. तार्किक क्षमता और मानसिक योग्यता (Reasoning & Mental Ability)

इस खंड में तार्किक विचार और गणितीय गणनाओं का परीक्षण किया जाता है:

  • तार्किक विचार (Logical Reasoning): निगमनात्मक (Deductive), आगमनात्मक (Inductive) तर्क; कथन और धारणाएं (Assumptions), कथन और तर्क (Arguments), कथन और निष्कर्ष (Conclusions), कथन और कार्यवाही की दिशा (Course of Action)।
  • मानसिक योग्यता (Mental Ability): संख्या और अक्षर श्रृंखला (Number/Letter Series), कोडिंग-डिकोडिंग (Coding-Decoding), रक्त संबंध (Blood Relations), दिशा ज्ञान (Direction Sense), तार्किक वेन आरेख, दर्पण और जल प्रतिबिंब, आकृतियों की गिनती करना।
  • आधारभूत संख्यात्मक क्षमता (Basic Numeracy): अनुपात, समानुपात और साझेदारी; प्रतिशत; साधारण और चक्रवृद्धि ब्याज (Simple & Compound Interest); समतल आकृतियों का क्षेत्रफल और परिमाप; डेटा विश्लेषण (सारणी, बार/लाइन ग्राफ, पाई चार्ट); औसत (समांतर, ज्यामितीय और हरात्मक माध्य), मध्यिका और बहुलक; क्रमचय और संचय (Permutation & Combination) तथा बुनियादी प्रायिकता (Probability)।

10. समसामयिक मामले (Current Affairs)

  • घटनाक्रम: राजस्थान, भारत और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख समसामयिक घटनाएं।
  • चर्चित विषय: हालिया समाचारों में चर्चित प्रमुख व्यक्तित्व, स्थान और संस्थान।
  • खेलकूद: खेल-खिलाड़ी, प्रमुख खेल प्रतियोगिताएं और खेल विकास से जुड़े समाचार।

आरएएस परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण सुझाव

  1. राजस्थान जीके (Rajasthan GK) पर विशेष ध्यान दें: आरएएस प्री में लगभग 35-40% प्रश्न राजस्थान के इतिहास, भूगोल, कला-संस्कृति और राजनीतिक व्यवस्था से पूछे जाते हैं।
  2. आर्थिक समीक्षा (Economic Survey) अवश्य पढ़ें: राजस्थान और भारत की आर्थिक समीक्षा तथा बजट से सीधे प्रश्न (विशेषकर सरकारी योजनाओं पर) पूछे जाते हैं।
  3. करंट अफेयर्स का दैनिक अध्ययन: राष्ट्रीय और राज्य स्तर के करंट अफेयर्स के लिए नियमित रूप से समाचार पत्र और मासिक पत्रिकाओं का अध्ययन करें।
  4. पिछले वर्षों के प्रश्न पत्र (PYQs): पिछले 5 वर्षों के आरएएस प्री प्रश्न पत्रों को हल करें, ताकि आपको प्रश्नों के स्तर और पूछने के तरीके का अंदाजा हो सके।
  5. मॉक टेस्ट सीरीज (Mock Test Series): परीक्षा जैसी वास्तविक परिस्थितियों में अभ्यास करने के लिए नियमित मॉक टेस्ट अवश्य दें। आप हमारी आधिकारिक वेबसाइट Nexus Civil Zone पर जाकर आरएएस प्री की उच्च गुणवत्ता वाली टेस्ट सीरीज में शामिल हो सकते हैं।
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Frequently Asked Questions / अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या RPSC RAS प्रारंभिक परीक्षा में नेगेटिव मार्किंग होती है?

हाँ, आरपीएससी आरएएस प्रारंभिक परीक्षा (RAS Prelims) में नकारात्मक अंकन (Negative Marking) का प्रावधान है। प्रत्येक गलत उत्तर के लिए 1/3 (एक तिहाई) अंक काटा जाता है।

RPSC RAS प्री परीक्षा में कुल कितने प्रश्न और कितने अंक होते हैं?

इस परीक्षा में सामान्य ज्ञान और सामान्य विज्ञान (General Knowledge & General Science) का केवल एक पेपर होता है, जिसमें कुल 150 बहुविकल्पीय (MCQ) प्रश्न पूछे जाते हैं। यह पेपर कुल 200 अंकों का होता है।

RAS प्रारंभिक परीक्षा के लिए कितना समय आवंटित किया जाता है?

आरएएस प्रारंभिक परीक्षा के पेपर को हल करने के लिए अभ्यर्थियों को कुल 3 घंटे (180 मिनट) का समय दिया जाता है।

क्या RAS प्री परीक्षा के अंक अंतिम मेरिट सूची में जोड़े जाते हैं?

नहीं, प्रारंभिक परीक्षा केवल एक स्क्रीनिंग टेस्ट (Qualifying Exam) है। इसके अंक अंतिम चयन मेरिट सूची में नहीं जोड़े जाते हैं। मुख्य परीक्षा (Mains) में बैठने के लिए इसे पास करना अनिवार्य है।

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